फिर से खड़ा हो गाया था। मैंने बारी बारी से दोनों चूचियाँ पी पी के दूध खाली कर दिया।मालिनी रानी भी गरम हो चली थी, मैंने दोनों चूचियों कस के भींच लीं और ज़ोर से उनको निचोड़ने लगा। मालिनी रानी सीत्कार पर सीत्कार भर रही थी। इतनी ताकत से निचुड़ निचुड़ कर अब चूचियों की सख्ती कम हो गई थी लेकिन ठरक बेतहाशा बढ़ जाने से वो बहुत गर्म हो चली थी।‘राजे… अब तू मेरी घोड़ी की तरह चुदाई कर !’ इतना कह के मालिनी रानी बिस्तर से उतर गई, दोनों टांगे चौड़ी करके खड़ी हुई और आगे झुक कर दोनों हाथ बिस्तर पर टिका लिये।फिर उसने अपने मुलायम, मांसल और चिकने चिकने नितम्ब पीछे को उठा दिये। पहले तो मैंने बैठ कर खूब जी भर के वह दिलकश नितम्ब सहला सहला के चाटे जिस पर मालिनी रानी ने मस्ता के सीत्कार भरे। उसकी ठरक अब बहुत बढ़ चुकी थी, उससे अब रुका नहीं जा
घर में पति के साथ मचाती है भाभी की गर्म मस्ती
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