जैसी आवाज़ों से गूंज रहा था।इस समय कोई देखता तो दोनों युवतियों को राजपरिवार की गरिमाशील महारानियों के बजाय कामातुर वैष्याएँ ही समझता। अब महाराज के लिए भी खुद पर काबू रख पाना कठिन हो गया , कभी अपने शिश्न को ज़ोर ज़ोर से दबाते, कभी अपने निपल्स को उमेठते।अंत में उन्होने भी कामुक क्रीडा में सम्मिलित होने का निश्चय किया और मदिरा का प्याला एक ओर रख कर उन दोनों के पास आ कर आरुषा की पीठ पर हल्के हल्के चुंबन लेने लगे। बीच बीच में दांतों से हल्के से कचकचा भी देते।महाराज की इन सब हरकतों से आरुषा और उत्तेजित हो कर सुवर्णा की कामकणिका का भुरता बनाने लगी और जवाब में सुवर्णा भी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए आरुषा की योनि पर अपनी जिव्हया से प्रहार करने लगीं।महाराज की आँखों के हल्के इशारे को समझ कर अब आरुषा सुवर्णा के मुख पर उकड़ू बैठ कर उनको अपने गुदाद्वार के भी दर्शन
गरमा गरम भाभी को चुदाई का मजा, देसी भाभी की चीखें साफ सुनाई दे रही हैं
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