….आज फिर मुझे तुम्हारी चूत मारनी है….” हँसते हुए संतोष बोला.“चोद लेना मुझे जी भरकर संतोष…..अब तो मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ!!” मेरी बहन ममता किसी अल्टर की तरह बोली।दोनों दोपहर लंच टाइम तक अपनी अपनी फाइल निपटाते रहे और लंच का समय हो गया। दोनों साथ में खाना खाने लगे। संतोष से चुदने के बाद ममता उस पर फ़िदा हो चुकी थी, और पूरी तरह से लट्टू हो चुकी थी। आज वो अपने यार और आशिक संतोष के लिए आलू के पराठे और बैगन का भरता बनाकर ले गयी थी।वो बड़े प्यार से अपने आशिक संतोष को अपने हाथ से पराठे खिला रही थी। खाने के बाद संतोष ने फिर से उसे बाहों में भर लिया और चुम्मा चाटी करने लगा। आज फिर से संतोष मेरी बहन को चोदना चाहता था। उसने ममता की सलवार निकाल दी और चड्ढी भी निकाल दी।दोनों चुदाई शुरू ही करने वाले थे की उस सहकारी बैंक के ब्रांच मनेजर पता
योग करते हुए स्टेपसिस की गर्म साँसें
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