मोटी औरत और विशाल लंड का बिस्तर से पहले जोरदार संभोग

मैं स्कूटी चलाता हूँ।‘क्या तुम चला लेते हो?’‘चला तो लेता हूँ पर दीदी मुझे चलाने ही नहीं देती।’ अरुण ने सृष्टि की शिकायत की।मैंने अब स्कूटी का हैंडल अरुण के हाथ में दिया और फिर दोनों हाथ साइड में कर लिए। अरुण थोड़ा धीरे धीरे डर डर कर चला रहा था। अब मेरे दोनों हाथ फ्री थे। मैंने फिर से अपना बायाँ हाथ पीछे किया तो हाथ फिर से सृष्टि की चूची को छूने लगा।इस बार सृष्टि ने मेरे हाथ से अपना शरीर दूर नहीं किया था। मैं अब धीरे धीरे सृष्टि की चूची को सहलाने लगा था। बीच बीच में कभी कभी हल्का हल्का दबा भी देता था। सृष्टि कुछ नहीं बोल रही थी बस उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया।मैं समझ चुका था कि सृष्टि को अपनी चूचियों पर मेरे हाथ का स्पर्श अच्छा लग रहा है। जब अरुण ने अचानक ब्रेक मारी तो मेरी तन्द्रा भंग हुई, घर आ चुका

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